महंगाई की मार: इस देश में 200 रुपये किलो आलू, 710 रुपये की 1 KG मिल रही मिर्च

नई दिल्ली: भारत का पड़ोसी देश श्रीलंका इस समय गहरे आर्थिक और मानवीय संकट से जूझ रहा है. श्रीलंका लगभग दिवालिया होने के कगार पर आ गया है. एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वहां मुद्रास्फीति रिकार्ड 11.1 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई है. इतना ही नहीं वहां के लोग मंहगाई की मार को झेल रहे हैं. श्रीलंका के Advocata Institute ने महंगाई को लेकर आंकड़े जारी किए हैं जिसमें बताया गया है कि खाद्यान्न वस्तुओं की कीमत एक महीने में ही 15 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं.

श्रीलंका में राष्ट्रीय वित्तीय आपातकाल घोषित

बता दें, पिछले साल 30 अगस्त को, श्रीलंका सरकार ने मुद्रा मूल्य में भारी गिरावट के बाद राष्ट्रीय वित्तीय आपातकाल की घोषणा की थी और उसके बाद खाद्य कीमतों में काफी तेज बढ़ोतरी हुई. श्रीलंका को चीन समेत कई देशों से लिए लोन को चुकाने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

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एक महीने में 15 फीसदी तक बढ़ी महंगाई

Advocata Institute के द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, श्रीलंका में नवंबर 2021 से दिसंबर 2021 के बीच खाद्य वस्तुओं की महंगाई 15 प्रतिशत बढ़ी है. श्रीलंका में 100 ग्राम मिर्च की कीमत जहां 18 रुपये थी वहीं, अब ये बढ़कर 71 रुपये हो गई है. यानी एक किलो मिर्च की कीमत 710 रुपये हो गई है. एक ही महीने में मिर्च की कीमत में 287 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.

200 रुपये तक पहुंचे 1 किलो आलू के दाम

इसके अलावा, बैंगन की कीमत में 51 फीसदी की तेजी आई है तो प्याज के दाम 40 फीसदी तक बढ़े हैं. आयात की कमी की वजह से यहां लोगों को मिल्क पाउडर तक नहीं मिल पा रहा है. इसके साथ ही एक किलो आलू की कीमक करीब 200 रुपये तक पहुंच गई है.

अन्य सब्जियों की कीमतें

टमाटर- 200 रुपये / किलो
बैंगन- 160 रुपये / किलो
भिंडी- 200 रुपये / किलो
करेला- 160 रुपये / किलो
बींस- 320 रुपये / किलो
बंदगोभी- 240 रुपये / किलो
गाजर- 200 रुपये / किलो
कच्चा केला- 120 रुपये / किलो

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दोहरे घाटे का सामना कर रहा है श्रीलंका

कोलंबो गजट की एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले दशक के एक बड़े हिस्से के दौरान श्रीलंका ने दोहरे घाटे का सामना कर रहा है. इसमें एक राकोजषीय घाटा और दूसरा कारोबारी घाटा है. आपको बता दें कि साल 2014 के बाद से श्रीलंका पर विदेशी कर्ज का स्तर भी लगातार बढ़ता ही जा रहा है. साल 2019 में यह कर्ज देश की जीडीपी के 42.6 फीसदी पर पहुंच गया था.

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