लीबिया में पैसा कमाने गए थे कुशीनगर के पांच युवक, न काम मिल रहा न ही खाना, फंसकर रह गए

कुशीनगर: काल के बाद जिस तरह बेरोजगारी बढ़ी है उसी प्रकार अब बेरोजगार युवा ठगी के शिकार भी हो रहे है, क्योंकि बढ़ती महंगाई और घर की जरूरते लोगों को परिवार से दूर देश विदेश तक कमाने के लिए जाना पड़ रहा है,और इन्ही मजबूरियों का फायदा कुछ ऐसे भी लोग है जो उठा रहे है,ऐसा ही मामला 

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कुशीनगर जिले के पांच लोगों सहित 27 लोगों के लीबिया में फंसे होने का मामला सामने आया है. वे वहां करीब एक वर्ष से फंसे हुए हैं. उन्हें वहां न तो काम मिल रहा है और न ही भोजन समय से दिया जा रहा है. उन्हें घर वापस भी नहीं जाने दिया जा रहा है. तंग आकर एक युवक शरीर पर पेट्रोल छिड़ककर आत्महत्या का प्रयास भी कर चुका है. इन लोगों ने विदेश मंत्रालय से और सोशल मीडिया के जरिए प्रवासी भारतीय मदद समूह से वतन वापसी कराने में मदद की गुहार लगाई है.

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कुशीनगर के कुछ परिवारों से उनके घर के सदस्यों के विदेश में फंसे होने और उन तक मदद पहुंचाने को लेकर जब हमने बात की, तो पता चला कुशीनगर जिले के मंजय निवासी मुड़िला हरपुर लीबिया गए तो थे खूब पैसा कमाने, लेकिन एजेंट ने फंसाकर रख दिया. उनके अलावा कुशीनगर के प्रेम प्रकाश यादव, कलामुद्दीन, अशोक साहनी और सतीश निषाद सबकी एक जैसी ही कहानी है. ये सभी घर की जरूरतों को पूरा करने के लिए पैसा कमाने लीबिया गए थे, पर वहां पर मुसीबत में फंस कर रह गए.

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कुशीनगर के ये लोग ही अकेले वहां नहीं फंसे, यूपी के देवरिया, महाराजगंज, गोरखपुर और  बाहर के जिलों में गोपालगंज के 27 लोग रोजी-रोटी के सिलसिले में लीबिया में फंसे हैं. वे लीबिया से पहले दुबई गए थे, लेकिन वहां पहुंचने पर उन्हें पता चला कि दुबई में उनके लिए कोई काम नहीं है. अब उन्हें काम पाने लीबिया जाना होगा. पहले तो वे जाने को तैयार नहीं हुए, लेकिन कंपनी ने उन्हें यह कहकर लीबिया जाने के लिए तैयार कर लिया कि वहां का प्रोजेक्ट भी उसी कंपनी का है और वहां भी एग्रीमेंट के हिसाब से सबकुछ सही तरीके से मिलेगा. यह आश्वासन पाकर वे सभी लीबिया चले गए. वहां जाने पर पता चला कि उन्हें किसी और कंपनी के हवाले कर दिया गया है. पासपोर्ट एवं अन्य दस्तावेज जमा होने के कारण वे न तो दुबई में कुछ कर सके और न ही लीबिया में. करीब 11 महीने तक कंपनी ने इनसे काम लिया. केवल जरूरत भर के रुपये देती थी.  11 अगस्त 2020 से ये लोग लीबिया में ही हैं. एक माह से ये लोग वतन वापसी के लिए विदेश मंत्रालय एवं प्रवासी भारत मदद समूह के सदस्यों से सोशल मीडिया के जरिए मदद की मांग कर रहे हैं.

जब जी यूपी यूके तक इन लोगों की खबर पहुंची तो हमने विदेश मंत्रालय तक उनकी परेशानी की सूचना पहुंचा दी है.

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