कटनी में लगा स्टोन आर्ट फेस्टिवल, लेकिन हो रहा गैरों पे करम अपनों पे सितम जैसा हाल

नितिन चावरे/कटनी: दिया तले अंधेरा या फिर गैरों पे करम अपनों पे सितम जैसी कहावत कटनी में आयोजित स्टोन आर्ट फेस्टिवल के लिए बिल्कुल फिट बैठती है. कटनी के जागृति पार्क में 9 नवम्बर से शुरू हुआ स्टोन फेस्टिवल 28 नवम्बर तक चलेगा. खास बात यह है कि इस आर्ट फेस्टिवल को कटनी कलेक्टर प्रियंक मिश्र ने लोकल फॉर वोकल का फॉर्मूला अपनाते हुए शुरू किया था. जिसका उद्देश्य स्थानीय लोगों को कला के जरिए रोजगार मिल सके, लेकिन यहां उल्टा हो रहा है. स्थानीय कलाकारों को रोजगार तो दूर उन्हें इस फेस्टिवल में एंट्री तक नहीं दी गई. या यूं कहें कि फेस्टिवल के अंतिम दिनों में औपचारिकता के लिए तहसीलदार के माध्यम से शीलपकारों को बुलावा भेजा गया. हालांकि इस संदेश को शीलपकारों ने सिरे से नकार दिया.

जिले के बिलहरी में शिल्पकारी का काम कर रहे राजू बर्मन और जितेंद्र बर्मन का कहना है कि वो शिल्पकारी का काम अपने पिताजी व दादा जी सीखे हैं, उनके पूर्वज खजुराहो के रहने वाले थे. उन्होंने खजुराहो की मूर्तियों को गढ़ा है और आज उनके वंशज कटनी की बिलहरी में अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे हैं. यही उनका जीवन यापन करने का एक मात्र साधन है, पर इसमें भी उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है. वन विभाग हो या खनिज विभाग रॉयल्टी भरने के बहाने से परेशान करते हैं. उन्होंने बताया कि स्टोन फेस्टिवल में जिला प्रशासन से किसी तरह का आमंत्रण नहीं दिया है. जब फेस्टिवल खत्म होने को आया तब सूचना भेजी है. पूरे कटनी जिले में सिर्फ हमारा ही परिवार शिल्पकारी करता है. लेकिन प्रशासन के इस रवैये ने उन्हें निराश किया है.

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मामले में जब कटनी कलेक्टर प्रियंक मिश्रा से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि देश के कई राज्यों से कलाकार आये हैं, जो अपनी शिल्पकारी का प्रदर्शन कर रहे हैं. कलाकार को चालीस हजार रुपये और उनके सहायक कलाकार को बीस हजार की राशि दी जा रही है. इस फेस्टिवल में पर्यटन विभाग व स्टेट मांनिंग विभाग से वित्तीय सहायता मिली है, जिले के मार्बल और सैंड स्टोन को नया मार्केट मिले और ब्रांडिंग हो. जब कलेक्टर महोदय से स्थानीय शीलपकारों को फेस्टिवल में न बुलाने का सवाल पूछा गया तो उन्होंने बात को घुमाते हुए कहा कि हम उनको प्रदर्शनी में बुलाएंगे. पर उन्होंने स्थानीय शीलपकारों के रोजगार के हितों की बात नहीं की. 

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