आदिवासी वोट बैंक को लेकर गहमागहमी तेज, Modi के बाद अब Congress पीसीसी का काउंटर प्लान पर काम

भोपाल: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में आदिवासी वोट बैंक (Tribal Vote Bank) को लेकर सियासत तेज है. हाल ही में शिवराज सरकार (Shivraj Singh Government) ने भोपाल में जनजातीय महासम्मेलन आयोजित किया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने दम भरा. उसी दिन कांग्रेस (Congress) ने भी जबलपुर में जनजातीय सम्मेलन किया. इसमें कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (Kamalnath) शामिल हुए. अब कांग्रेस पीसीसी काउंटर प्लान बनाने की तैयारी में है.

सियासी मास्टर स्ट्रोक
आदिवासियों को साधने के लिए आज कांग्रेस पीसीसी काउंटर प्लान पर काम करेगी, जिसे लेकर कमलनाथ आज बड़ी बैठक लेंगे. सत्ता की चाबी अपने हाथ मे रखने के लिए कांग्रेस खास रणनीति बना रही है. इसको लेकर आज कमलनाथ एससी-एसटी समुदाय के पार्टी विधायकों से मिलेंगे. बता दें एसटी की 47 और एसटी की 32 विधानसभा सीटों को लेकर चर्चा होनी है. बीजेपी के जनजातीय गौरव दिवस के जरीए आदिवासियों को साधने के लिए सियासी मास्टर स्ट्रोक चला था. अब इसकी काट के लिए कांग्रेस की रणनीति बैठक होने जा रही है.

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मोदी और शाह दिखा चुके हैं दम
आदिवासियों को साधने की जुगत लगातार जारी है. हाल ही में हुआ कांग्रेस का आदिवासी सम्मेलन बीजेपी को अपनी ताकत बताने के लिए था, हालांकि उस दिन कांग्रेस कुछ कमाल नहीं दिखा पाई. सम्मेलन में प्रदेश भर से आदिवासियों को आमंत्रित किया था. इससे पहले 18 सितंबर को जबलपुर में शहीदी दिवस पर बीजेपी ने आयोजन रखा था, जिसमें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शामिल हुए थे. 2023 के लिए शाह के बाद मोदी के दौरे के जरिए आदिवासियों को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई. इसी कड़ी में अब कांग्रेस पीसीसी बैठक कर रही है.

BJP को आदिवासी सीटों पर हुआ था नुकसान 
बता दें राज्य में 43 आदिवासी समूह हैं, जिनकी कुल आबादी 2 करोड़ से ज्यादा है. चुनावों के समीकरण पर नजर डालें तो 230 में से 84 विधानसभा सीटों पर उनका असर दिखता है. मप्र में 2018 के विधानसभा चुनाव में BJP को आदिवासी सीटों पर भारी नुकसान देखनी पड़ा था, जिसके चलते इस बार बीजेपी का केंद्र नेतृत्व भी अलर्ट मोड पर है. उधर कांग्रेस भी कोई कमी नहीं रख रही है. कमलनाथ ने राज्य का मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार विश्व आदिवासी दिवस के दिन सार्वजनिक अवकाश शुरू किया था, जिसे शिवराज सरकार के फिर से सत्ता में आने के बाद भी जारी रखा गया, लेकिन इस साल सार्वजनिक अवकाश की सूची से विश्व आदिवासी दिवस को हटा दिया. कमलनाथ ने इसे मुद्दा बनाया तो शिवराज ने ऐलान कर दिया कि 15 नवंबर को प्रदेश में शहीद बिरसा मुंडा की जंयती पर प्रदेश में बड़ा आयोजन किया जाएगा.

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