छत्तीसगढ़ में अब गोबर से बनेगा नेचुरल पेंट, भूपेश बघेल की मौजूदगी में हुआ MOU, इन लोगों के खातों में भेजे गए 2 करोड़ 35 लाख

Chhattisgarh News (रायपुर) – प्रदेश की भूपेश बघेल सरकार गोबर से बिजली और जैविक खाद बनाने के बाद अब गोबर से प्राकृतिक पेंट (paint will be made from cow dung) बनाने जा रही है. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उपस्थिति में रविवार को उनके निवास कार्यालय में गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाने की तकनीकी हस्तांतरण के लिए एमओयू किया गया. गोबर से पेंट बनाने का ये एमओयू छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग और नेशनल पेपर इंस्टीट्यूट जयपुर, खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग, सूक्ष्म ,लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय भारत सरकार, नई दिल्ली के बीच हुआ है.

इसके तहत प्रथम चरण में राज्य के 75 चयनित गौठान में प्राकृतिक पेंट निर्माण की इकाई स्थापित की जाएगी. मुख्यमंत्री बघेल ने बताया कि इसके लिए गौ सेवा आयोग को अधिकृत किया गया है और कृषि विभाग द्वारा कार्य योजना तैयार की गई है. 

भूपेश बघेल बोले- गोधन न्याय योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिली
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने गोधन के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए गांवों में गौठानों का निर्माण कराकर और गोधन न्याय योजना (godhan nyay yojana) की शुरूआत कर एक साथ कई लक्ष्य साधे हैं. गोधन न्याय योजना के जरिए हम गौठानों में दो रूपए किलो में गोबर की खरीदी कर इससे प्राकृतिक पेंट निर्माण की शुरूआत करने जा रहे हैं. इस मौके पर सीएम ने ‘गोधन न्याय योजना’ के तहत पशुपालक किसानों, ग्रामीणों सहित गोठान समितियों, महिला स्व -सहायता समूहों को 2 करोड़ 35 लाख रुपए की राशि ऑनलाइन ट्रांसफर की.

‘गोधन न्याय योजना हमारे गांवों की ताकत बन चुकी है’
मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में गोधन न्याय योजना की शुरुआत 20 जुलाई 2020 को हरेली तिहार के दिन से की गई थी. इस योजना की शुरुआत करते हुए मैंने कहा था कि यह योजना हमारे लिए वरदान साबित होगी. हम इस योजना के माध्यम से एक साथ बहुत सारे लक्ष्य हासिल करेंगे. बहुत थोड़े से समय में ही मेरी वह बात सच साबित हो चुकी है, आज गोधन न्याय योजना हमारे गांवों की ताकत बन चुकी है. 

मुख्यमंत्री बघेल के संबोधन की बड़ी बातें

  1. गोधन न्याय योजना के माध्यम से पूरे देश में छत्तीसगढ़ को नयी पहचान मिली है.
  2. हमारी इस योजना को दूसरे राज्य भी अपनाना चाहते हैं.
  3. संसद की कृषि मामलों की स्थायी समिति ने इसे पूरे देश में लागू करने की मांग केंद्र सरकार से की है. 
  4. गौठानों में जैविक खाद के निर्माण से हमारी खेती में भी बदलाव की शुरुआत हुई. 
  5. रासायनिक खाद पर हमारी निर्भरता कम हुई. खेती की लागत में कमी आई. 
  6. हमारे खेत फिर से उपजाऊ होने लगे.
  7. स्व सहायता समूहों की हजारों बहनों को जैविक खाद के निर्माण से रोजगार मिला. 
  8. गौठान समितियों को आमदनी का एक नया जरिया मिला. 
  9. पशुपालन और डेयरी व्यवसाय को नया जीवन मिला और दूध का उत्पादन भी बढ़ा.
  10. इसी गोबर से हमारी बहनों ने दीये और तरह-तरह के चीजें बनाकर त्यौहारी-बाजार में भी अपने लिए जगह बनाई.

गोठानों में भी बिजली उत्पादन की तैयारी 
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आगे कहा कि 02 अक्टूबर 2021 से हमने गोबर से बिजली बनाने की शुरुआत की. बेमेतरा, दुर्ग और रायपुर जिले के तीन गोठानों में सफलता के साथ बिजली का उत्पादन किया जा रहा है. अब गोबर से बिजली और जैविक खाद दोनों एक साथ बन रहे हैं. प्रदेश के अन्य गोठानों में भी बिजली उत्पादन की तैयारी की जा रही है. अब गौठानों में गोबर से प्राकृतिक पेंट भी बनाया जाएगा. इससे गौठानों को हर साल 45 करोड़ रुपए की आय होने का अनुमान है. इस काम की शुरुआत 75 गौठानों से की जा रही है. इस समय प्राकृतिक पेंट की कीमत जीएसटी को छोड़कर 120 रुपए प्रति लीटर है.

चयनित इकाइयों से प्रतिदिन 500 लीटर प्राकृतिक पेंट का उत्पादन होगा.

  • पहले चरण में प्रतिवर्ष 37.50 लाख लीटर प्राकृतिक पेंट का उत्पादन होने की संभावना है.
  • प्राकृतिक पेंट के निर्माण के लिए गौठान से जुड़ी महिला स्व सहायता समूह की महिलाओं और गांवों के युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा.
  • इस काम की शुरुआत होने से गोधन न्याय योजना और गौठानों के माध्यम से रोजगार और आय का एक और नया जरिया खुल जाएगा.
  • प्राकृतिक पेंट के निर्माण का मुख्य घटक कार्बोक्सी मिथाईल सेल्यूलोज (सीएससी) होता है.
  • सौ किलो गोबर से लगभग 10 किलो सूखा सीएमसी तैयार होता है.
  • कुल निर्मित पेंट में 30 प्रतिशत मात्रा सीएमसी की होती है.
  • वर्तमान में 25 गौठानों में पेंट निर्माण ईकाई तथा 50 गौठानों में सीएमसी ईकाई स्थापित की जाएगी.

11 हजार से अधिक गौठानों के निर्माण की स्वीकृति दी गई- मंत्री रविन्द्र चौबे
कार्यक्रम में कृषि एवं जल संसाधन मंत्री रविन्द्र चौबे ने कहा कि गोधन न्याय योजना के, जो सार्थक परिणाम सामने आए हैं, उसकी कल्पना भी नहीं की गई थी. आज राज्य में 11 हजार से अधिक गौठानों के निर्माण की स्वीकृति दी गई है. गौठानों में गोबर से प्राकृतिक पेंट के निर्माण का ऐतिहासिक काम शुरू करने जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि गोबर धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है. घर-आंगन एवं पूजा स्थल को पवित्र करने के लिए गोबर की लिपाई की परंपरा रही है. अब गोबर से प्राकृतिक पेंट का निर्माण होगा, जिससे पूरे घर की पोताई होगी.

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