Tomato Price: तेल के महंगे होने से नहीं बल्कि इस वजह से आसमान छू रहे टमाटर के भाव

भोपाल: इन दिनों ने टमाटर के भाव आसमान छू रहे हैं. टमाटर की महंगाई के लिए पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोतरी भी एक वजह हो सकती है. लेकिन मध्य प्रदेश में टमाटर के दामों में बढ़ोतरी की असल वजह कुछ और है. हमारा मध्य प्रदेश में बड़े पैमाने पर टमाटर की खेती के लिए जाना जाता है. 

मध्य प्रदेश में शाजापुर, शुजालपुर, कालापीपल, सीहोर और बक्तरा जैसे क्षेत्रों के किसान बड़ी मात्रा में टमाटर की खेती करते हैं, लेकिन इस पूरे इलाके में मॉनसून के बाद टमाटर की फसल लगाई जाती है. मॉनसून के समय और उससे पहले शिवपुरी के आसपास के इलाके में भी बड़े पैमाने पर टमाटर की खेती की जाती है. शिवपुरी के अलावा कोलारस, पोरी, बैराड़ के आसपास के किसान टमाटर की खेती करते हैं. यहां नामधारी 962, अभिलाष और साहू प्रजाति का टमाटर ज्यादा उगाया जाता है.

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मीडिया रिपोर्ट की माने तो इस फसल सही नहीं हुई है. किसानों के पास सिर्फ 25 फीसदी का उत्पादन बचा है. साथ प्रतिएकड़ फसल भी नहीं निकल रही है. टमाटर की फसल पर इस साल अतिवृष्टि का नकारात्मक प्रभाव पड़ा है, जिससे थोक बाजार में टमाटर के भाव 1100 रुपए प्रति कैरेट पहुंच चुके हैं. यही कारण है कि टमाटर आम आदमी की थाली और सब्जी से गायब हो रहा है. भाव आसमान चढ़ रहे हैं. भोपाल-इंदौर और ग्वालियर में टमाटर फुटकर बाजार में 80-90 रुपए प्रति किलो के भाव बिक रहा है.

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टमाटर के भाव बढ़ने की असल वजह किसानों ने बताई है. उन्होंने बताया कि ज्यादा बारिश होने की वजह से टमाटर की फसल खराब हुई. बारिश के बाद जो फसल लगाई गई, जमीन में ज्यादा पानी होने से उसकी जड़ भी कमजोर हो गई. इससे पौधे ठीक से नहीं पनपे और सड़ गए. पौधों में बीमारी लग गई. एक एकड़ जमीन पर बीते बीते साल तक टमाटर की जो फसल की लागत 1 लाख हुआ करती थी. मौजूदा साल में 1.8 लाख रुपए प्रति एकड़ तक पहुंच गई. पैदावार कम हुई है. यही वजह है कि टमाटर के पहले से ही महंगे होने के आसार बन गए थे. जैसी आशंका थी टमाटर की फसल भी कम निकली, जिससे किसानों की लागत और बढ़ती गई. इस साल अतिवृष्टि से ब्राउन डॉट्स, ब्लैक डॉट्स, ब्लैक और ग्रीन मच्छर और सेबुलर का अटैक हुआ है. इसकी वजह से फसल का उत्पादन गिरा है.  

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