गंगा उद्वह योजना से मिटेगी लाखों लोगों की बुझेगी प्यास, जानिए क्यों है खास

Patna: गंगा उद्वह योजना (Ganga Water Lift Project) नीतीश सरकार की जल-जीवन-हरियाली की मुहिम से जुड़ी है, जिसका मकसद जलवायु परिवर्तन के बुरे प्रभावों को कम करना है. ‘उद्वाह’ का मतलब है, ऊपर उठाना या लाना. इस योजना के जरिये गया, बोधगया, राजगीर और नवादा को गंगाजल पहुंचाया जाएगा. इन जगहों पर लंबे वक्त से पेयजल की समस्या बनी हुई है. अब यहां पाइपलाइन से गंगाजल लाया जा रहा है, जो कि पेयजल के तौर पर इस्तेमाल होगा. 

पेयजल की मौजूदा समस्या के साथ भविष्य की भी जरूरतों को देखते हुए यह योजना शुरू की गई है. उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा में इसी तरह की योजनाओं के अध्ययन के बाद बिहार सरकार ने गंगा उद्वह योजना की शुरुआत की है. पहले चरण की योजना पूरी होने पर करीब 9 लाखों की आबादी की प्यास बुझाई जा सकेगी. बिहार सरकार का जल संसाधन विभाग इस योजना पर काम कर रहा है. यह योजना तीन चरणों में पूरी होगी. इसी साल जून में पहले चरण की योजना पूरी करने का लक्ष्य था, लेकिन कोविड के चलते योजना में देर हुई है.

बजट में 1338.81 करोड़ की बढ़ोतरी

मोकामा के पास हाथीदह से गंगाजल लाया जाएगा, जो कि 149 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन से गया, बोधगया, राजगीर और नवादा तक पहुंचाई जाएगी. 118 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा कर लिया गया है. यह पाइपलाइन मरांची, मोकामा, सरमेरा, बरबीघा, शेखोपुरसराय, कतरीसराय और घोड़ा कटोरा से गुजरेगी. इस योजना को 19 दिसंबर, 2019 को कैबिनेट ने मंजूरी दी थी. 

इसके पहले चरण के लिए 2,836 करोड़ रुपये के बजट की मंजूरी दी गई थी, लेकिन खर्च बढ़ने की वजह से बजट में 1338.81 करोड़ की बढ़ोतरी कर दी गई, यानी कि अब पहले चरण का संशोधित बजट 4,174 करोड़ रुपये हो चुका है. पिछले 3 जुलाई को हुई कैबिनेट की बैठक में संशोधित बजट को मंजूरी दी गई.

तीन जलाशयों का हो रहा निर्माण

उम्मीद की जा रही है कि अगले साल जून तक गया, बोधगया और राजगीर को गंगाजल की आपूर्ति होने लगेगी. गंगा से पानी लाकर बड़े जलाशयों में इकट्ठा किया जाएगा और फिर ट्रीटमेंट के बाद आपूर्ति की जाएगी. इसके लिए राजगीर के घोड़ा कटोरा, गया के तेतर और अबगिल्ला पहाड़तल्ली में जलाशय बनाए जा रहे हैं. अबगिल्ला पहाड़तल्ली में  0.938 मिलियन क्यूबिक मीटर का आरसीसी टैंक बनाया जा रहा है, इसमें गया और बोधगया में पांच दिनों तक पानी आपूर्ति की क्षमता होगी. वहीं, तेतर में 18.633 मिलियन क्यूबिक मीटर का आरसीसी टैंक बनाया जा रहा है.

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हाथीदह से पानी लाकर पहले तेतर में उसे शुद्ध किया जाएगा, फिर अबगिल्ला के ट्रीटमेंट प्लांट में इकट्ठा किया जाएगा. इस योजना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खासी दिलचस्पी ले रहे हैं, बल्कि कहें कि यह उनका ड्रीम प्रोजेक्ट है. कई बार स्थल निरीक्षण के साथ वह हवाई सर्वेक्षण भी कर चुके हैं.