अमरूद की खेती कर आप भी कर सकते हैं लाखों की कमाई, MP के दिनेश कुछ ही महीने में बने लखपति

भोपालः मध्य प्रदेश में अमरूद किसान के रूप में अपनी पहचान बना चुके दिनेश बगड़ के बाग में जब आप जाएंगे तो आपको कई सौ विशाल अमरूद लटके हुए नजर आएंगे. उनका बगान इस वक्त बहुत बड़े क्षेत्रफल में फैला है, जिससे उन्हें हर साल 32 लाख रुपये का मुनाफा हो रहा है. आने वाले समय में वह इसे और भी फैलाने की योजना पर काम कर रहे हैं. द बेटर इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि कुछ साल पहले तक उनके बगान ऐसे नहीं थे जैसे आज दिखाई दे रहे हैं .

कीट और कवक बन गए थे परेशानी
साजोद-राजोद गांव के रहने वाले दिनेश बताते हैं कि करीब 11 साल पहले अपनी 4 एकड़ की पुश्तैनी जमीन पर वह परंपरागत रूप से मिर्च, भिंडी, टमाटर, करेला व अन्य मौसमी सब्जियों को उगा रहे थे. ज्यादा लोगों की मेहनत वाले इस काम पर उनकी फसल पर कीटों और कवक के प्रकोप ने उनके मुनाफे और आय को कम कर दिया. उन्हें अपनी फसल पर इच्छानुसार दाम भी नहीं मिल पा रहा था. इसी से दुखी हो उन्होंने पारंपरिक खेती छोड़ अमरूद की खेती करने का मन बनाया. 

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2010 में शुरू किया था अमरूद लगाना
दिनेश ने बताया कि 2010 में उनके दोस्त ने उन्हें अमरूद की थाई किस्म की बागवानी के बारे में बताया. उन्होंने बताया कि अमरूद को परखने के लिए वह पड़ोस के एक बाग में गए, जहां हर अमरूद का वजन करीब 300 ग्राम तक था. इस किस्म को VNR-1 कहा जाता है. दिनेश को जब पता लगा कि फल की शेल्फ-लाइफ 6 दिनों की है और संक्रमण का खतरा भी कम रहता है. उन्हें लगा ये बाजार में बेचने के लिए सबसे बेहतर हो सकता था, इसी कारण उन्होंने अमरूद उगाना शुरू किया. 

सालाना 32 लाख की होती है कमाई
2010 में चार एकड़ से शुरू किए गए बाग से बढ़ाकर आज उन्होंने 4000 पौधे लगा लिए, उन्हें सालाना 32 लाख रुपये की कमाई हो रही है. उनसे प्रेरित होकर राज्य के करीब 400 और किसानों ने भी अमरूद लगाना शुरू कर दिया. दिनेश बताते हैं, ‘शुरू में, मुझे संदेह था कि फलों की किस्म को अपने बड़े आकार को प्राप्त करने के लिए हार्मोन या कुछ रसायनों के साथ इंजेक्ट किया गया था. लेकिन अपने खेत में कुछ पौधे लगाने के बाद, पारंपरिक कृषि तकनीकों का पालन करते हुए मुझे 11 महीने में पहली बार फल मिले. जिसमें सबसे बड़े फल का वजन 1.2 किलो था.’

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आय में हुई पांच गुना की वृद्धि
पहले साल मिली सफलता को देखते हुए उन्होंने अपने भाइयों के साथ 10 साल में 4 हजार पेड़ लगाने के लिए 18 एकड़ जमीन लीज पर ली. उन्होंने बताया कि पिछले कुछ सालों में ही उनकी आय में पांच गुना की वृद्धि हुई, इससे उन्हें काफी राहत मिली. इस क्षेत्र में अमरूदों को सफलता पूर्वक उगाने वाले वह पहले व्यक्ति थे. 

नहीं बिक रहे थे बड़े अमरूद
दिनेश ने बताया कि इन पेड़ों को न्यूनतम रखरखाव की आवश्यकता होती है और इन पर ध्यान भी कम दिया जाता है. मार्केटिंग के समय उन्हें परेशानी आई, लोग अमरूद को उसके बड़े आकार देखकर खरीद नहीं रहे थे. एक बार में एक किलो का अमरूद का सेवन कर पाना मुश्किल होता. उन्हें लगा अमरूदों को बेचने के लिए एक अलग बाजार की मांग है. 

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दूसरे राज्यों में शुरू किया बेचना
अपने क्षेत्र में बिक्री नहीं होते देख उन्होंने भीलवाड़ा, जयपुर, उदयपुर, अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत, पुणे, मुंबई, बेंगलुरु, भोपाल और दिल्ली समेत 12 से ज्यादा बाजारों में अपनी फसल को बेचना शुरू किया. 2016 में मुंबई में 185 रुपये प्रति किलो अमरूद बेचने पर उन्हें बहुत फायदा मिला. दिल्ली और मुंबई के ग्राहकों ने फल की सराहना की. उन्होंने आने वाले समय में अपने खेत को पांच एकड़ तक बढ़ाने की योजना बनाई है.

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