एक ऐसा मंदिर जहां हर मनोकामना होती है पूर्ण, सालभर लगता है श्रद्धालुओं का तांता

Jaipur: राजस्थान के जयपुर (Jaipur News) जिले की पांडव कालीन विराटनगर कस्बे के निकट गांव की अरावली पहाड़ियों के मध्य में स्थित मनसा माता का मंदिर (Mata Mansa Temple) क्षेत्र में लोगों की आगाध श्रद्धा का केन्द्र है. यह माता के 52 शक्तिपीठों में से 41 वां शक्ति पीठ मंदिर है.

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यहां भक्तों की मनोकामना पूर्ण करने वाली माता के रूप में विशेष पहचान और मान्यता है. नवरात्रि (Navratri 2021) में यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा रहता है और दिन-रात भजनों की बयार बहती है. जयपुर, अलवर, दिल्ली, कोलकाता, गुजरात, पंजाब सहित दर्जनों प्रदेश के लोग यहां आते है.

माता पार्वती यज्ञ में जाने की जिद करने लगी
जानकारी के अनुसार, राजा प्रजापति दक्ष की पुत्री के रूप में माता जगंदबिका ने सती के रूप में जन्म लिया था. सती ने भगवान शिव से विवाह किया था और राजा दक्ष इस विवाह से प्रसन्न नहीं थे. एक बार राजा दक्ष ने एक यज्ञ का आयोजन करवाया था लेकिन उस यज्ञ में भगवान शिव को नहीं बुलाया गया. वहीं, जब इसका पता माता पार्वती को चला तो वह यज्ञ में जाने की जिद लगा बैठी.

माता पार्वती ने प्राणों की आहूती दे दी
भगवान शिव के लाख मना करने पर भी वह नहीं मानी तो भगवान शिव यज्ञ में पहुंच गए, जहां राजा दक्ष भगवान शिव को देखकर क्रोधित हो गए और भगवान शिव का अपमान कर दिया. इस पर सती से भगवान शिव का अपमान सहन नहीं हुआ और उन्होंने यज्ञ कुंड में कूदकर प्राणों की आहूती दे दी.

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51 शक्ति पीठों की स्थापना
इस पर भगवान शिव क्रोधित हो गए और सती के पार्थिव शरीर को यज्ञ कुण्ड से निकाल कर कंधे पर डालकर भूमंडल पर तांडव करने लगे, जिससे पृथ्वी पर प्रलय की स्थिती पैदा हो गई. इस पर भगवान विष्णु नें सुर्दशन चक्र चलाकर सती के शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर एक-एक कर धरती पर गिराते रहे, जहां सती के अंग गिरे, वहां 51 शक्ति पीठों की स्थापना हुई.

मां मनसा के रूप में होती है पूजा
इनमें से यह 41वां शक्ति पीठ है और अम्बिकेश्वर माता के रूप प्रतिस्थापित हुई. इस मंदिर के बारे में यह भी कहा जाता है कि जब पांडवों ने विराटनगर में अज्ञातवास बिताया था तो राजा युधिष्ठिर ने मां अम्बिकेश्वर से मन्नत मांगी और मन्नत पूरी होने पर इसे मां मनसा के रूप में प्रतिस्थापित किया गया. इसके बाद से इसे मनसा माता के रूप में भी जाना जाने लगा. इस मंदिर की प्रसिद्धि का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यहां देश के कोने-कोने से शीश नवाने लोग आते है.

Reporter- Amit Yadav