Jaipur: वन विभाग में बाघों की गिनती अक्टूबर से शुरू, वैज्ञानिक विधि से की जाएगी गणना

Jaipur: वन विभाग बाघों की राष्ट्रव्यापी गिनती अक्टूबर महीने से शुरू करने जा रहा है. यह गणना हर चार साल में बाघों की राष्ट्रव्यापी गिनती होती है. इस साल अक्टूबर में बाघों की राष्ट्रव्यापी गिनती 5 वीं बार होने जा रही है. इसके लिए राजस्थान वन विभाग (Rajasthan Forest Department) ने तैयारियां शुरू कर दी है और देशभर में एक जैसी विधि अपनाई जाती है. इस वैज्ञानिक विधि को केंद्र सरकार ने एक स्वरूप दिया है, उसी स्वरूप से राजस्थान, मध्यप्रदेश सहित पूरे देश में बाघों की गणना की जाती है. 

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पूरे विश्व की 13 टाइगर रेंज कंट्री में टाइगर गणना की एक ही विधि है. राष्ट्रव्यापी बाघों की गणना में भी विश्वभर में अपनाई जाती है, वहीं भारत देश के सभी राज्यों में विधि अपनाई जाती है. आज की स्थिति में बाघों की गणना की विधि सर्वश्रेष्ठ विधि है. तकनीकि का प्रयोग, मैचिंग का प्रयोग, उन प्राणियों के फेस का प्रयोग, साइड स्लाइस का प्रयोग होता है. पहले मूल रूप से पग मार्क सेंसर हुआ करते थे और पग मार्क के आधार पर मेजरमेंट करते थे. कैमरा ट्रेप मैथर्ड अपनाए जा रहे है. वन विभाग के अधिकारियों की एक्सचेंज विजिट होती है. पूरे देश के टाइगर्स रिजर्व डायरेक्टर हाल ही में राजस्थान दौरे पर रहे थे. ऐसे ही वन विभाग के हर राज्य के अधिकारियों का एक्सचेंज विजिट होती है. इसका मूल उद्देश्य है कि वेस्ट प्रयोग है उसको एक दूसरे से सिखना और समझना है.  

वन विभाग के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक अरिन्दम तोमर ने बताया कि राष्ट्रव्यापी बाघों की गणना राजस्थान (Rajasthan News) में विशेष कोई प्रक्रिया नहीं अपनाई जाती है. पूरे देश में बाघों की गणना अपनाई जाती है उसी विधि के आधार पर राजस्थान में बाघों की गणना की जाती है. इस बार राजस्थान में बाघों की संख्या में इजाफा होने की संभावना जताई है. अभी फिलहाल राजस्थान में 100 से अधिक बाघों की संख्या है. इसमें बच्चें भी शामिल बताए जा रहे है लेकिन जो बाघों की गणना होती है उसमें सिर्फ बड़े वेस्ट बाघों को ही गिना जाता है. इस बार राजस्थान में बाघों की गणना में क्षेत्र बढ़ाया है, जिन क्षेत्रों में बाघ चले गए है चाहे वे टाइगर रिजर्व (Tiger Reserve) के बाहर हो वहां भी कैमरा ट्रेपिंग, मैचिंग प्रयोग का उपयोग किया जाता है. 

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देश में सबसे ज्यादा 526 बाघ-बाघिन मध्य प्रदेश में हैं.  इसके बाद 424 कर्नाटक और उत्तराखंड में 442 और उत्तर प्रदेश इनकी संख्या 173 है. राजस्थान में बाघों की संख्या बढ़ने लगी है. 100 से ज्यादा बाघों वाला यह देश का नौवां राज्य बन गया है. राज्य में बाघों की संख्या 103 है और  रणथंभौर में बाघिन टी-111 द्वारा चार शावकों को जन्म दिया है. चार नए मेहमान आने के बाद वन विभाग ने बाघों की सुरक्षा व संरक्षण को लेकर विशेष कार्य योजना बनाई है. अब जंगल में अतिरिक्त कैमरे लगाने के साथ ही वनकर्मियों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी. पिछले तीन साल में राज्य में 33 बाघ बढ़े हैं. वर्तमान में सबसे ज्यादा 71 बाघ रणथंभौर में हैं. इनमें 51 बाघ-बाघिन और 18 शावक हैं. देश में बाघों के संरक्षण की यह मुहिम 2006 से शुरू हुई.