UP Vidhansabha Chunav 2022: पुरकाजी सीट पर 33% मुस्लिम वोटर, कांग्रेस-BJP में होगी कड़ी टक्कर

मुजफ्फरनगरः UP Vidhan Sabha Election 2022: उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. 2017 में मोदी लहर ने इस हिंदी भाषी राज्य पर अच्छा-खासा प्रभाव छोड़ा, नतीजा यह रहा कि बीजेपी ने यूपी की सत्ता पर कब्जा जमाया. कयास लगाए जा रहे हैं कि इस बार विपक्ष को मोदी के साथ योगी लहर का भी सामना करना पड़ेगा. इलेक्शन को देखते हुए हम लेकर आए हैं यूपी की सभी 403 विधानसभा सीटों का एनालिसिस. यहां जानें मुजफ्फरनगर जिले की पुरकाजी सीट

 

 

सीट का नामपुरकाजी विधानसभा
सीट नंबर13
मतदाता3,03,532
पुरुष1,68,538
महिला1,34,977

 

जनपद का 70 फीसदी क्षेत्र है ग्रामीण

मुजफ्फरनगर जिले में उत्तर प्रदेश विधानसभा की कुल 8 सीट आती हैं, बुढाना सीट भी उन्हीं में से एक है. जनपद मुजफ्फरनगर राज्य का वह जनपद है दो भारत की दो प्रमुख नदियों गंगा और यमुना के बीच बसा हुआ है. यहां की उपजाऊ भूमि के कारण किसान व मजदूर काफी सम्पन्न हैं. गन्ना और गेहूं यहां प्रमुख रूप से उगाया जाता है, इस जनपद में 8 शुगर मिल हैं, वहीं सैकड़ों की संख्या में पेपर मिल व स्टील प्लांट भी चलाए जा रहे हैं. इस जनपद की 70 फीसदी आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है.

 

 

पुरकाजी सीट का इतिहास

मुजफ्फरनगर जिले की 6 विधानसभा सीटों में से एक पुरकाजी विधानसभा का गठन 2011 में हुआ था. सीट अनुसूचित जाति के उम्मीदवार के लिए आरक्षित है. यहां अब तक दो बार विधानसभा चुनाव हुए, पहला 2012 और दूसरी बार 2017 में. 2011 से पहले पुरकाजी और उसके आस-पास का कुछ इलाका चरथावल विधानसभा और कुछ हिस्सा मोरना विधानसभा सीट का हिस्सा रहा है. पुरकाजी उन विधानसभा क्षेत्रों में से एक है, जो उत्तराखंड की सीमा से लगा हुआ और जो दिल्ली देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग NH 58 पर बसा हुआ है. 

 

शैक्षिक और आर्थिक रूप से है पिछड़ा हुआ

पुरकाजी विधानसभा क्षेत्र शैक्षिक और आर्थिक रूप से काफी पिछड़ा हुआ है, पुरकाजी नगर पंचायत क्षेत्र में कोई भी सरकारी इंटर या डिग्री कॉलेज तक नहीं है. इलाके के लोगों द्वारा यहां शैक्षणिक संस्थान स्थापित करने की मांग तेजी से उठती रही है, लेकिन किसी ने भी इस ओर अभी तक ध्यान नहीं दिया. क्षेत्र के लोगों द्वारा इसके लिए आंदोलन भी किए गए हैं. 

 

 

कौन सी पार्टी करती है डॉमिनेट?

सीट पर अब तक दो बार हुए विधानसभा चुनाव में दो अलग-अलग पार्टियों के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की. 2012 में बसपा और 2017 में बीजेपी प्रत्याशी विधायक बना. ऐसे में यहां किसी भी पार्टी ने साफ तौर पर डॉमिनेट नहीं किया, लेकिन कांग्रेस यहां हर बार दूसरे स्थान पर रही है. 

 

 

सालविधायकपार्टी
2012अनिल कुमारबसपा
2017प्रमोद उटवालबीजेपी

         

जातिगत समीकरण

पुरकाजी सीट पर सबसे ज्यादा मुस्लिम, जाट, चमार, जाट, गुर्जर और त्यागी वोटर्स हैं. यहां करीब एक लाख मुस्लिम, 58 हजार चमार और 24 हजार जाट वोटर हैं. उनके अलावा यहां पाल, ब्राह्मण, त्यागी और ठाकुर वोटर भी बहुत अधिक संख्या में हैं. 

 

 

बसपा और बीजेपी उम्मीदवार बने विधायक

पुरकाजी सीट पर अब तक दो बार विधानसभा चुनाव हुए, 2012 और 2017 में. 2017 में 65.08 फीसदी लोगों ने वोट डाले थे. तब बीजेपी उम्मीदवार प्रमोद उटवाल ने कांग्रेस के दीपक कुमार को हराया था. बीजेपी को 37.93 फीसदी और कांग्रेस को 32.42 फीसदी वोट मिले थे. दोनों के बीच जीत का अंतर करीब 11 हजार वोटों का था. 

 

2012 विधानसभा चुनाव में बसपा के अनिल कुमार ने जीत हासिल की थी. तब भी कांग्रेस के दीपक कुमार दूसरे नंबर पर रहे थे. बसपा उम्मीदवार ने 8908 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी. 

 

क्या थी जीत की वजह?

2017 में बीजेपी ने जिन भी सीटों पर जीत हासिल की, ज्यादातर सीटों पर मोदी लहर का प्रभाव रहा. मुजफ्फरनगर की इस सीट पर भी बीजेपी उम्मीदवार प्रमोद उटवाल के जीत की असली वजह मोदी लहर को ही माना गया. इस बार बीजेपी उन्हें ही अपने उम्मीदवार के रूप में उतार सकती है. वहीं कांग्रेस की भूमिका भी इस सीट पर अहम रहेगी, अब तक हुए दो विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार को नजदीकी हार का सामना करना पड़ा था, दोनों ही बार कांग्रेस दूसरे स्थान पर थी. वहीं बसपा उम्मीदवार ने 2012 चुनाव में जीत हासिल की थी.

 

 

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