गठिया के दर्द से मिलेगा परमानेंट छुटकारा, घुटने में इलेक्ट्रिक करंट से होगा इलाज!

नई दिल्लीः गठिया रोग से लाखों लोग पीड़ित हैं. विभिन्न प्रकार की दवाइयां लेने के बावजूद आराम नहीं मिलता. ऐसे में इलेक्ट्रिक घुटना प्रत्यारोपण गठिया रोगियों के लिए कारगर साबित हो सकता है, क्योंकि वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक हासिल कर ली है, जिसमें इलेक्ट्रिक करंट की मदद से cartilage को दोबारा से बनाया जा सकता है. 

गठिया एक आम और दर्दनाक बीमारी है, जो किसी व्यक्ति के जोड़ों को नुकसान पहुंचाती है. जैसे-जैसे cartilage बिगड़ने लगता है तो हड्डी से टकराने लगता है. इससे चलने और घुटनों के अन्य की गतिविधियों को करने में काफी दर्द होता है. यह रोग तब होता है, जब हड्डियों के सिरों को कुशन करने वाला सुरक्षात्मक cartilage समय के साथ खराब हो जाता है. यह घुटनों की गतिविधियों को कठिन बना देता है, जिससे दर्द और जकड़न होती है.ऐसे में वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किया गया नया cartilage घुटनों के दर्द को कम करने में मदद करता है.

पीजोइलेक्ट्रिसिटी

अमेरिका के कनेक्टिकट राज्य में बायोइंजीनियरों ने लगभग आधा मिलीमीटर मोटा एक छोटा जाल प्रत्यारोपण विकसित किया है, जो दबाव महसूस होने पर छोटा इलेक्ट्रिक करंट उत्पन्न करता है. इसे पीजोइलेक्ट्रिसिटी भी कहा जाता है. जिन गठिया रोगियों ने प्रत्यारोपण किया हो, उनके जोड़ों में लगातार होने वाले हरकत से इम्प्लांट एक इलेक्ट्रिक क्षेत्र पैदा करेगा, जो कोशिकाओं को उपनिवेशित करने और नए cartilage में विकसित होने के लिए प्रोत्साहित करेगा. 

खरगोश में किया गया परीक्षण
वैज्ञानिकों द्वारा किये गए प्रयोगों में खरगोश के घुटने में cartilage को सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया गया. इससे गठिया रोगियों के जोड़ों को ठीक करने में काफी मदद मिलेगी. cartilage के लिये किया गया यह शोध साइंस ट्रांसलेशनल मेडिसिन में प्रकाशित किया गया है. इस शोध का नेतृत्व कनेक्टिकट विश्वविद्यालय के एक बायोइंजीनियर थान गुयेन ने किया है. गुयेन ने कहा कि प्रयोग का परिणाम काफी चौंकाने वाला है लेकिन अभी इस cartilage का परीक्षण बड़े जानवर में करने की जरूरत है, जिसका आकार और वजन इंसान के बराबर हो. यह तकनीक अगर सफल हो जाती है, तो गठिया रोगियों को काफी मदद मिल सकती है और उनका दर्द कम हो सकता है.

पुरानी तकनीक नहीं थी कारगर
वर्तमान समय में गठिया रोग के उपचार के लिये क्षतिग्रस्त cartilage को शरीर के किसी अंग से लिये गए हिस्से या डोनर द्वारा दान किये गए अंग से बदला जाता है. यह स्वस्थ cartilage आपका अपना है, तो इसे ट्रांसप्लांट करने से शरीर के उस हिस्से पर चोट लग सकती है, जहां से इसे लिया गया है. वहीं, इसे किसी अन्य व्यक्ति से लिया गया है, तो आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली इसे अस्वीकार कर सकती है. बता दें कि पहले पुराने गठिया के दर्द को कम करने के लिए कुछ शोधकर्ताओं ने शरीर को खुद cartilage विकसित करने के लिए रासायनिक कारकों को बढ़ाने की कोशिश की थी. 

नैनोफाइबर से बना गया टिश्‍यू
गुयेन के अनुसार, दोबारा से बनाया गया cartilage शरीर के मौजूदा cartilage की तरह व्यवहार नहीं करता है. यह जोड़ों पर दबाव पड़ने पर टूट जाता है. गुयेन की प्रयोगशाला ने पॉली-एल लैक्टिक एसिड (पीएलएलए) के नैनोफाइबर से बने ऊतक scaffold को डिजाइन किया है, जो एक बायोडिग्रेडेबल पॉलीमर है, जो चिकित्सा घावों को सिलाई करने के लिए उपयोग किया जाता है.  जब इसे निचोड़ा जाता है, तो यह एक छोटा सा इलेक्ट्रिक करंट (पीजोइलेक्ट्रिकिटी) पैदा करता है. कनेक्टिकट विश्वविद्यालय में प्रमुख लेखक डॉ. यांग लियू कहते हैं कि पीजोइलेक्ट्रिकिटी एक घटना है, जो मानव शरीर में भी मौजूद है. हड्डी, cartilage, कोलेजन, डीएनए और विभिन्न प्रोटीनों में पीजोइलेक्ट्रिक प्रतिक्रिया होती है. जोड़ों की नियमित गतिविधि जैसे चलने पर व्यक्ति के scaffold को एक कमजोर, लेकिन इलेक्ट्रिक क्षेत्र बनाता है, जो कोशिकाओं को बनाने और cartilage में बदलने के लिए प्रोत्साहित करता है. 

अभी परीक्षण किए गए जानवरों पर होगा शोध
जब शोध करने वाली टीम ने हाल ही में घायल खरगोश के घुटने में scaffold का परीक्षण किया, तो उसके बाद उसे ट्रे़डमिल पर कूदाया गया. इसके बाद cartilage आश्चर्यजनक तरीके से वापस बढ़ गई. गुयेन की प्रयोगशाला इलाज किये गए जानवरों का कम से कम एक या वर्ष तक निरीक्षण करना चाहती है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि cartilage भरोसेमंद है. वे पुराने जानवरों में भी PLLA scaffold का परीक्षण करना चाहते हैं, क्योंकि गठिया मुख्य रूप से बुढ़ापे में मनुष्यों पर असर डालता है. एनएचएस के अनुसार, गठिया रोग 40 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों में होता है और यह खासकर महिलाओं में होना आम बात है.