Chanakya Niti: इन चार चीजों के साथ रहने का अर्थ है कि मौत को गले लगाना, जानें आज की चाणक्य नीति

Chanakya Niti For Motivation in Hindi: चाणक्य नीति कहती है कि व्यक्ति को अपने आसपास मौजूद लोग और होनी वाली घटनाओं पर सूक्ष्म दृष्टि रखनी चाहिए. यदि आप अपने पास मौजूद रहने वाले लोगों के बारे में भलिभांत परिचित नहीं है तो कभी भी धोखा या मृत्युतुल्य कष्ट भी मिल सकता है. चाणक्य की गिनती भारत के श्रेष्ठ विद्वानों में की जाती है. चाणक्य स्वयं एक योग्य शिक्षक थे. यही कारण है कि चाणक्य को आचार्य चाणक्य के नाम से भी जाना जाता है. 

चाणक्य शिक्षक होने के साथ एक कुछ अर्थशास्त्री भी थे. इसके साथ ही चाणक्य को राजनीति शास्त्र, कूटनीति शास्त्र और समाज शास्त्र जैसे महत्वपूर्ण विषयों के भी ममर्ज्ञ थे. चाणक्य ने अध्ययन और अपने अनुभव से जो भी महसूस किया उसे, चाणक्य नीति में बताने और समझाने का प्रयास किया. चाणक्य की चाणक्य नीति व्यक्ति को सही और उचित मार्गदर्शन प्रदान करती है. यही कारण है कि इतने वर्ष बीत जाने के बाद भी चाणक्य नीति की प्रासंगिकता कायम है. आज भी बड़ी संख्या में लोग चाणक्य नीति का अध्ययन करते हैं और जीवन में सफल होने की प्रेरणा प्राप्त करते हैं. चाणक्य के अनुसार व्यक्ति को कुछ बातों को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. ये बातें क्या हैं, आइए जानते हैं-

दुष्ट पत्नी- चाणक्य नीति कहती है कि पत्नी योग्य और पति की सफलता में योगदान करने वाली होनी चाहिए. जिस व्यक्ति की पत्नी योग्य और कुशल होती है, उसे धरती पर ही स्वर्ग की प्राप्ति होती है. वहीं जब पत्नी धोखा करे, अपनी जिम्मेदारियों को अनदेखा करें और गलत आचरण करे तो ऐसी पत्नी से सावधान रहना चाहिए. चाणक्य के अनुसार इस आचरण की पत्नी, मृत्युतुल्य कष्ट प्रदान करती है.

झूठा मित्र- चाणक्य नीति कहती है कि मित्र बनाते समय बहुत सावधानी बरतनी चाहिए. चाणक्य के अनुसार सच्चा मित्र वही है जो संकट के समय साथ खड़ा रहे. जरूरत पड़ने पर उचित सलाह प्रदान करे. आपके दुख को अपना दुख समझे, यही सच्चे मित्र की निशानियां है. ऐसे व्यक्ति को कभी अपना मित्र नहीं बनाना चाहिए जो गलत सलाह प्रदान करे, आपसे झूठ बोले और अपने स्वार्थ तथा हितों के लिए गंभीर रहे. चाणक्य के अनुसार ऐसा मित्र आगे चलकर हानि भी पहुंचा सकता है. इसलिए इनसे दूर ही रहना चाहिए.

धोखेबाज सेवक- चाणक्य नीति कहती है कि सेवक को वफादार होना चाहिए. जो सेवक अपने मालिक को सदैव धोखा देने के लिए तैयार रहे और मालिक की दरियादिली का गलत फायदा उठाए, ऐसे सेवक से सावधान रहना चाहिए. ऐसा सेवक कभी भी मुश्किल में डाल सकता है.

सर्प से नजदीकी- चाणक्य के अनुसार सर्प के पास कभी नहीं जाना चाहिए. ये कभी भी हमला कर सकता है. विष से भरे लोगों से भी दूर ही रहना चाहिए. क्योंकि विष रखने वाला कभी भी मौत का कारण भी बन सकता है. 

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