शनि के साथ गुरु भी हैं वक्री, मकर राशि में गुरु-शनि की युति इन राशियों की बढ़ा सकती है मुश्किल

Jupiter Retrograde 2021: मकर राशि में गुरु का राशि परिवर्तन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बहुत ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है. 14 सितंबर 2021 से गुरु मकर राशि में गोचर करेंगे. जहां पर शनि पहले से ही वक्री होकर विराजमान हैं. शनि के साथ गुरु की युति मेष से मीन राशि तक के जातकों को प्रभावित करेगी.

गुरु और शनि का स्वभाव
ज्योतिष शास्त्र में गुरु और शनि को महत्वपूर्ण ग्रह माना गया है. ये दोनों ही बड़े ग्रह माने गए हैं. इसलिए दो बड़े ग्रहों का एक साथ आना, कई मामलों में विशेष माना जाता है. गुरु जहां ज्ञान के कारक हैं, वहीं शनि को न्याय का कारक माना गया है. इसके साथ ही प्रशासन, उच्च पद, उच्च शिक्षा आदि गुरु के प्रभाव वाले क्षेत्र हैं. जबकि शनि परिश्रम, जनता, विज्ञान, लोहा, तेल, खनिज आदि पर शनि का प्रभाव माना गया है. इसलिए इन दोनों ही ग्रहों का एक साथ आन इन क्षेत्रों को प्रभावित करेगा.

गुरु और शनि को कैसे बनाए शुभ
गुरु को देवताओं का गुरु भी कहा गया है. वहीं शनि देव को कलियुग का दंडाधिकारी. ये दोनों ही ग्रह नियम और अनुशासन को मानते हैं. अनैतिक कार्यों को करने से गुरु और शनि अशुभ फल प्रदान करते हैं. इसलिए इन ग्रहों को शुभ रखना है तो गलत कार्यों को कभी नहीं करना चाहिए.

वक्री ग्रह 2021
गुरु और शनि दोनों ही वर्तमान समय में वक्री हैं. मकर राशि में शनि वक्री होकर गोचर कर रहे हैं. शनि देव 11 अक्टूबर 2021 को वक्री से मार्गी होंगे, जबकि 18 अक्टूबर 2021 को गुरु वक्री से मार्गी होंगे.

इन राशियों को देना होगा ध्यान
मिथुन और तुला राशि पर शनि की ढैय्या चल रही है, वहीं धनु, मकर और कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती बनी हुई है. इसलिए इन राशियों को विशेष ध्यान देने की जरूरत है. इसके साथ ही मेष, सिंह, वृश्चिक और मीन राशि वाले धन का निवेश ध्यान से करें. जॉब और करियर में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. बॉस को प्रसन्न रखने का प्रयास करें.

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