हथियार के अवैध लाइसेंस बनाने के मामले में CBI ने तीन राज्यों में 41 ठिकानों पर की छापेमारी


<p style="text-align: justify;">जम्मू कश्मीर में सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से बने लाखों अवैध शस्त्र लाइसेंसों के मामले में सीबीआई ने आज जम्मू कश्मीर, मध्य प्रदेश और दिल्ली में कुल 41 स्थानों पर छापेमारी की. इस छापेमारी के दौरान अनेक अहम दस्तावेज लॉकरों की चाबियां, पुरानी करेंसी आदि बरामद हुई है. यह छापेमारी तत्कालीन 5 जिला मजिस्ट्रेट के यहां भी की गई. छापेमारी के दौरान एक डायरी भी बरामद हुई है, जिसमें अनेक आपत्तिजनक विवरण दर्ज बताए जा रहे हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">सीबीआई प्रवक्ता आरसी जोशी के मुताबिक आज की छापेमारी श्रीनगर, अनंतनाग, बनिहाल बारामुला, जम्मू, डोडा, राजौरी, किश्तवार, लेह, मध्य प्रदेश के भिंड और दिल्ली में की गई. छापेमारी कुल मिलाकर 41 स्थानों पर की गई और यह छापेमारी 14 तत्कालीन लोक सेवकों के ठिकानों, पांच बिचौलियों के ठिकाने और तत्कालीन लिपिक आदि के यहां पर की गई. इस छापेमारी के दौरान हथियार लाइसेंस जारी करने की सूची, जिन लोगों को अवैध तरीके से हथियार दिए गए उनकी सूची, इस बिक्री से आए निवेश से संबंधित दस्तावेज, संपत्ति के दस्तावेज, बैंक खातों का विवरण, अनेक लाकरों की चाबियां और एक डायरी भी बरामद हुई है. इसके अलावा जो भारतीय मुद्रा चलन में बंद हो चुकी है यानी पुरानी मुद्रा भी बरामद हुई है. सीबीआई सूत्रों का दावा है कि आज की छापेमारी के दौरान जो डायरी बरामद हुई है, उसमें अनेक आपत्तिजनक विवरण भी मिले हैं, जिनकी जांच का काम जारी है. जिन लोक सेवकों के यहां छापेमारी की गई, उन्हें कश्मीर प्रशासनिक सेवा और भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी भी शामिल हैं.</p>
<p style="text-align: justify;">सीबीआई के आला अधिकारी के मुताबिक इस घोटाले से संबंधित पहली FIR जम्मू कश्मीर के सतर्कता शाखा में दर्ज की गई थी. ये एफआईआर साल 2012 से साल 2016 की अवधि के दौरान तत्कालीन जम्मू कश्मीर राज्य में थोक हथियार लाइसेंस अवैध लोगों को जारी किए जाने के आरोप पर दर्ज की गई थी. इस मामले में यह भी आरोप है कि हथियारों के लाइसेंस ऐसे लोगों को दिए गए जो उनके पात्र ही नहीं थे. साथ ही अनेक लाइसेंसों के लिए फर्जी दस्तावेज लगाए गए. इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से लाइसेंस जारी किए गए.</p>
<p style="text-align: justify;">एक अनुमान के मुताबिक इस दौरान लगभग दो लाख 78 हजार अवैध लाइसेंस जारी किए गए. सीबीआई ने इस मामले में दो अलग-अलग FIR को जांच के लिए अपने हाथ में लिया था. इस जांच के दौरान यह भी पाया गया कि इस पूरे घोटाले में लगभग एक दर्जन से ज्यादा गन डीलरों यानी सरकारी हथियारों की बिक्री करने वाली दुकानों की भी भूमिका थी. सीबीआई ने इन लोगों के यहां भी छापेमारी की है. आरोप के मुताबिक अवैध लाइसेंस जारी करने के बदले सरकारी लोक सेवकों और अन्य लोगों ने रिश्वत ली और इस रिश्वत की बंदरबांट भी हुई. मामले की जांच जारी है.</p>
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