UP चुनाव में सीमा पार से रची जा रही ‘रोहिंग्या साजिश’? ATS की पूछताछ में कई खुलासे

लखनऊ (अनुज मिश्रा): उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव 2022 (UP Election 2022) की तैयारियां राजनीतिक पार्टियों ने शुरू कर दी हैं, लेकिन इसी के साथ सीमा पार से भी यूपी चुनाव यानी योगी आदित्यनाथ के चुनाव पर असर डालने की साजिशें शुरू हो गई हैं. इसका खुलासा प्रदेश के कई शहरों से 11 रोहिंग्याओं (Rohingya) की गिरफ्तारी के बाद हुआ है. यूपी एटीएस (UP ATS) ने ये गिरफ्तारियां की हैं और इसके बाद पूछताछ से मालूम चला है की चुनाव से पहले बड़ी तादाद में रोहिंग्या को यूपी के अलग अलग शहरों में बसाने की तैयारी की गई है.

रोहिंग्या मुसलमानों पर यूपी एटीएस पर पैनी नजर

पिछले कुछ दिनों में एक नहीं दो नहीं तीन नहीं, उत्तर प्रदेश के अलग अलग जिलों से 11 रोहिंग्या मुसलमानों को गिरफ्तार किया गया है. यूपी एटीएस (UP ATS) की पैनी नजर उत्तर प्रदेश के अलग अलग जिलों में अवैध रूप से रह रहे और गैर कानूनी कामों में लगे हुए उन रोहिंग्याओं पर जम गई है, जो बॉर्डर से घुसपैठ करके उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में अपनी जड़ों को गहरा कर रहे हैं. 2022 विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर रोहिंग्याओं की मौजूदगी कई शंकाओं को बढ़ा रही है.

वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करने की तैयारी

आशंका जताई जा रही है यूपी इलेक्शन (UP Election) से पहले रोहिंग्याओं को प्रदेश में बसाकर बड़ी साजिश रचने की तैयारी की गई है. खबर ये भी है कि साजिश का ये पूरा ताना बाना सीमा पार से बुना जा रहा है. यूपी में गिरफ्तार किए गए रोहिंग्याओं से पूछताछ के बाद जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक रोहिंग्या को वोटबैंक की तरह तैयार किया जा रहा था. वहीं रोहिंग्या मुसलमानों के जरिए विधान सभा चुनाव में गड़बड़ी भी फैलाने की साजिश की जांच भी की जा रही है.

क्या सीमा पार से रची जा रही है साजिश?

एक बड़ा सवाल ये भी उठता है कि उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनाव (UP Assembly Election) से पहले बड़े पैमाने पर रोहिंग्या की घुसपैठ के पीछे का असली मकसद क्या है? क्या उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव 2022 को लेकर सीमा पार से कोई साजिश रची जा रही है, क्योंकि अचानक से रोहिंग्या की घुसपैठ में सक्रियता बढ़ी है और खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई हैं.

इनपुट के आधार पर यूपी एटीएस का एक्शन

उत्तर प्रदेश एटीएस को केंद्रीय खुफिया एजेंसियों से भी रोहिंग्या घुसपैठियों की साजिश की जानकारी मिली थी, जि​सके बाद प्रदेश में रोहिंग्या मुसलमानों पर कार्रवाई शुरू हुई. इसी का नतीजा है कि कुछ ही दिनों में उत्तर प्रदेश से 11 रोहिंग्याओं को गिरफ्तार किया गया है. यूपी लॉ एंड ऑर्डर एडीजी प्रशांत कुमार ने बताया, ‘ऐसे कोई भी व्यक्ति जो गैंरकानूनी तरीके से प्रदेश में प्रवास कर रहे हैं. जैसे बांग्लादेशी या रोहिंग्या हैं. अन्य केंद्रीय एजेंसियों से इनपुट मिलता रहता है और उनके आधार पर कार्रवाई की जाती है. विशेष अभियान रोंहिग्या पर अभियान चला रहे हैं.

कहां से हुई रोहिंग्याओं पर शिकंजा कसने की शुरुआत?

एटीएस ने इसी साल 6 जनवरी को संत कबीर नगर जिले के समर्थन गांव में बसे रोहिंग्या अजीजुल्लाह को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद 28 फरवरी को अलीगढ़ के कमेला रोड पर रह रहे मोहम्मद फारुख और हसन को पकड़ा था. फिर फारुख के भाई शाहिद को 1 मार्च को उन्नाव से पकड़ा गया. इन सभी की गिरफ्तारी के बाद एटीएस को प्रदेश में छिपकर रह रहे कई रोहिंग्याओं के बारे में जानकारी मिली. जिसके बाद रोहिंग्या घुसपैठियों पर प्रदेश में शिकंजा कसने की शुरुआत की गई.

फर्जी दस्तावेज के जरिए लाए जाते हैं लोग

यूपी एटीएस ने गाजियाबाद से 2 रोहिंग्या मुसलमानों को गिरफ्तार किया है. आमिर हुसैन और नूर आलम की गिरफ्तारी बड़ी कामयाबी है, क्योंकि ये रोहिंग्या मुलसमानों की घुसपैठ करवाने के मास्टरमाइंड हैं. ये दोनों फर्जी दस्तावेज तैयार करवाकर म्यांमार-बांग्लादेश के लोगों को भारत लाते थे. गिरफ्तार हुए इन अपराधियो से पूछताछ में कई बड़े खुलासे हुए है. पता चला है कि आमिर हुसैन नामक वेंडर है, जो अवैध तरीके से रोहिंग्या नागरिकों की भारत में एंट्री कराता है. वेंडर दिल्ली के खजूरी खास इलाके से अपना काम ऑपरेट करता है.

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कैसे पहचान छिपाते हैं रोहिंग्या मुसलमान?

अब आप ये सोच रहे होंगे कि आखिरकार बांग्लादेश और म्यांमार से आने वाले रोहिंग्या मुसलमान भारत में अपनी पहचान छिपाने में कैसे कामयाब हो जाते हैं. आप ये भी सोच रहे होंगे कि आखिरकार पुलिस की निगाहें इतनी देर से रोहिंग्या घुसपैठियों तक कैसे पहुंचती है. इसका खुलासा भी यूपी एटीएस ने किया है. रोहिंग्या मुसलमानों की उत्तर प्रदेश के कई जिलों से गिरफ्तारी और चुनाव में रोहिंग्या मुसलमानों के जरिए साजिश की हर एंगल से जांच की जा रही है.

यूपी एटीएसी ने जो खुलासे किए हैं वो चौंकाने वाले हैं. ये खुलासे ये भी बताते हैं कि साजिश रचने वालों की जड़े कितनी गहरी हैं. एटीएस पूछताछ में हुए खुलासे के मुताबिक रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को यूपी में ठिकाना बनाने के लिए तैयार किया जा रहा है. विधान सभा चुनाव से पहले इन सभी को राशन कार्ड और पैन कार्ड बनवाकर स्थाई सदस्यता दिलवाने की साजिश है, जिससे यूपी चुनाव में इनकी भागीदारी हो और एक बड़ा वोट बैंक तैयार किया जाए. इसके लिए इनको अच्छी खासी रकम भी दी जाती है.

कैसे इतनी आसानी से मिल जाते हैं सरकारी दस्तावेज

अब सवाल ये भी उठता है कि आखिरकार इन रोहिंग्या मुलसमानों को इतनी आसानी से सरकारी दस्तावेज कैसे मिल जाता है? तो इसके पीछे वो हैंडलर हैं, जो बांग्लादेश और म्यांमार जैसे देशों से इनकी घुसपैठ भारत में करवा रहे हैं. कई बार ये हैंडलर सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर तो कई बार फर्जी दस्तावेज बनाकर रोहिंग्या मुसलमानों का नाम वोटर लिस्ट में डलवा रहे हैं. यूपी के पूर्व डीजीपी अरविंद जैन ने कहा कि रोहिंग्या मुसलमानों के सरकारी दस्तावेज इतनी आसानी से कैसे बन जाते हैं, इस सवाल का जवाब लगाना जरूरी है.

पीएफआई भी दे रही है रोहिंग्या को संरक्षण

साफ है रोहिंग्या की उत्तर प्रदेश में साजिश के पीछे एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है. अब सुरक्षा एजेंसियां धीरे धीरे इन नेटवर्क को तोड़ने और यूपी में छिपकर रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों को तलाश करने की कोशिश में जुटी हुई हैं. यूपी के अलग अलग जिलों से हो रही रोहिंग्या मुसलमानों की गिरफ्तारी के बाद से यूपी एटीएस धीरे धीरे साजिशों के तार खोल रही है. गिरफ्तार किए गए रोहिंग्या मुसलमानों से एक चौंकाने वाली जानकारी भी मिली है, जिसके मुताबिक रोहिंग्या को भारत में पीएफआई भी संरक्षण दे रही है.

सीएए के खिलाफ प्रदर्शन में नजर आई थी रोहिग्या की भूमिका

उत्तर प्रदेश के साथ साथ देश के कई हिस्सों में हुए इस हिंसक प्रदर्शन में भी रोहिंग्या मुसलमानों की भूमिका सामने आई थी. कानपुर में हिंसा भड़काने के आरोप में पीएफआई सदस्यों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था, जिनमें कई रोहिंग्या मुसलमान शामिल थे. खुफिया एजेंसियों की नजर अब पीएफआई और रोहिंग्या के कनेक्शन पर भी है, क्योंकि सीएए विरोधी प्रदर्शनों में पीएफआई ने अवैध रूप से भारत में घुसे रोहिंग्या मुसलमानों का इस्तेमाल किया था.

यूपी एटीएस की पूछताछ में हुए कई बड़े खुलासे

फिलहाल यूपी एटीएस (UP ATS) ने जिन रोहिंग्या मुसलमानों को गिरफ्तार किया है. उनसे पूछताछ में सामने आया है कि कई रोहिंग्या अपने बंग्लादेशी रिश्तेदारों के साथ यहां रहने आए थे. बांग्लादेश और म्यामांर से हजारों रोहिंग्या यहां आए हैं, जिनके बंग्लादेशी रिश्तेदार काफी पहले से यहां रह रहे हैं. बंग्लादेशियों को यहां की स्थानीय भाषा आती है और उनके रहने पर कोई रोकटोक नहीं है. इसलिए वह शहरी क्षेत्रों में रह रहे हैं, लेकिन भाषा की वजह से पकड़े जाने के डर से शुरुआत में आने वाले रोहिंग्या को यूपी के गांवों में रहने का ठिकाना यही बंग्लादेशी दिलवाते हैं. ज्यादातर रोहिंग्या नागरिक यूपी के ग्रामीण क्षेत्रों या उससे सटे छोटे कस्बों में रह रहे हैं, लेकिन अब यूपी एटीएस इनकी पहचान करके ​गिरफ्तारियां कर रही है.

उत्तर प्रदेश में चलाया जा रहा है अभियान

यूपी के एडीजी ने प्रशांत कुमार बताया, ‘ये लोग अपना नाम बदलकर गलत नामों से ऐसी जगहों पर जाते हैं, जहां पर ये लोकल पॉपुलेशन से मिक्स कर जाते हैं. अपने यहां बाहर के प्रदेशों में भी इस पर अभियान चलाया जाता है. मैं आपको सिर्फ उत्तर प्रदेश के बारे में बताना चाहूंगा. ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश में अभियान चलाया जा रहा है हम लगातार गिरफ्तारियां कर रहे हैं.

सामने आ सकते हैं रोहिंग्या से जुड़े और सच

उत्तर प्रदेश एटीएस रोहिंग्या की गिरफ्तारी के साथ साथ अब रोहिंग्या मुसलमानों को वापस बांग्लादेश और म्यांमार भेजने की तैयारी भी कर रही है. जैसे-जैसे यूपी में रोहिंग्या के नेटवर्क का खुलासा होगा. वैसे-वैसे यूपी विधान सभा चुनाव की रोहिंग्या साजिश से जुड़े और भी कई सच सामने आ सकते हैं.

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