मतली की दवा से कैंसर रोगी लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं? जानिए

Anti-nausea Drug Help Cancer Patients: मतली के खिलाफ इस्तेमाल की जानेवाली दवा से कैंसर रोगियों को लंबे समय तक जीवित रहने की संभावना पैदा हुई है. शोधकर्ताओं का कहना है ब्रेस्ट, पैंक्रियाज और दूसरे प्रकार के कैंसर से पीड़ित रोगियों को अगर सर्जरी के दौरान दवा दी जाए तो बड़ा फायदा पहुंच सकता है. नई रिसर्च को ANESTHESIOLOGY 2021 की सालाना मीटिंग में पेश किया गया था.

क्या मतली की दवा कैंसर रोगियों को दे सकती है लंबी जिंदगी?

रिसर्च से संकेत मिला कि कैंसर की सर्जरी के तीन महीनों बाद दवा इस्तेमाल करनेवालों के मुकाबले डेक्सामेथासोन (Dexamethasone) नहीं लेनेवाले तीन गुना से ज्यादा मरीजों की मौत हो गई. हार्वर्ड मेडिकल स्कूल बोस्टन के शोधकर्ता मैक्समिलियन शफेर ने कहा, “डेक्सामेथासोन का सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव होता है. ये कैंसर के विकास को रोकता है, लेकिन इम्यून सिस्टम को भी दबाता है.” कीमोथेरेपी के दौरान या सर्जरी के बाद उल्टी और मतली को रोकने के लिए मरीजों को दवा दी जाती है.

शोधकर्ताओं का कहना है कि नन इम्यूनोजेनिक कैंसर जैसे सार्कोमा और ब्रेस्ट, यूटेरस, ओवरी, पैंक्रियाज, थायरायड, हड्डी और जोड़ के कैंसर पीड़ितों में डेक्सामेथासोन मध्य से लंबी अवधि के नतीजों को सुधार सकती है. रिसर्च के लिए शोधकर्ताओं ने 74,058 मरीजों के रिकॉर्ड का विश्लेषण किया. 2005 और 2020 के बीच इजराइल और 2007 और 2015 के बीच मैसाचुएट्स जेनेरल अस्पताल बोस्टन में उनकी नन इम्यूनोजेनिक कैंसर के ट्यूमर को हटाने के लिए सर्जरी की गई थी.

सर्जरी के बाद डेक्सामेथासोन मौत का जोखिम करती है कम

कुल 25,178 (34 फीसद) मरीजों को सर्जरी के दौरान डेक्सामेथासोन का इस्तेमाल कराया गया. 90 दिनों बाद 209 (0.83 फीसद) डेक्सामेथासोन लेनेवाले मरीजों की मौत हो गई. नतीजे से पता चला कि डेक्सामेथासोन समेत कई फैक्टर को ध्यान में रखते हुए दवा लेनेवालों को सर्जरी के बाद एक साल के अंदर मरने का 21 फीसद जोखिम कम होता है. दूसरे विश्लेषण में डेक्सामेथासोन खास तौर पर उन लोगों के लिए फायदेमंद साबित हुई जिनको ओवरी, यूटेरस का कैंसर था.

शफेर ने बताया, “हमारे डेटा के आधार पर एनेस्थिसियोलॉजिस्ट को नन इम्यूनोजेनिक कैंसर के ऑपरेशन से गुजरनेवाले रोगियों को डेक्सामेथासोन देने में अधिक आत्मविश्वास महसूस करना चाहिए. ये न सिर्फ मतली में मदद करती है बल्कि इसका नतीजा बेहतर जीवित रहने में भी हो सकता है.”

Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधि, तरीक़ों व दावों की एबीपी न्यूज़ पुष्टि नहीं करता है. इनको केवल सुझाव के रूप में लें. इस तरह के किसी भी उपचार/दवा/डाइट पर अमल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.

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