बायोलॉजिक-ई ने बूस्टर डोज के तौर पर ‘कोर्बेवैक्स’ के थर्ड फेज के क्लीनिकल ट्रायल की इजाजत मांगी

कोविशिल्ड या कोवैक्सीन की दोनों डोज ले चुके लोगों के लिए सिंगल बूस्टर डोज के तौर पर फार्मा कंपनी बायोलॉजिक-ई (Biological E) ने ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से कोरोना वैक्सीन कोर्बेवैक्स (Corbevax) के थर्ड फेज के क्लीनिकल ट्रायल की इजाजत मांगी है.

हैदराबद की दवा कंपनी बायोलॉजिक-ई की तरफ से विकस्ति ‘कोर्बेवैक्स’ स्वदेशी वैक्सीन है जिसकी दूसरे और तीसरे फेज के ट्रायल का नतीजा इसी महीने आ सकता है. इस आरबीडी प्रोटीन सब-यूनिट वैक्सीन को 18 से 80 साल के आयुवर्ग के लोगों को दिया जाना है. 

हाल ही में डीजीसीआई को थर्ड फेज के क्लीनिकल ट्रायल की इजाजत मांगते हुए कंपनी ने आवेदन दिया था. कंपनी ने कहा था कि वह कॉर्बेवैक्स की सेफ्टी का मूल्यांकन करने के लिए तीसरे फेज के क्लीनिकल ट्रायल की इजाजत मांगती है.  डीसीजीआई ने सितंबर में कंपनी को कुछ शर्तों के साथ 5 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों में वैक्सीन के दूसरे और तीसरे फेज के क्लीनिकल ट्रायल की इजाजत दी थी.

सरकार ने पिछले हफ्ते कहा था कि कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोड के उपयोग से संबंधित विज्ञान अभी भी विकसित हो रहा है और घटनाक्रम पर करीब से नजर रखी जा रही है. बता दें कि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने भारत में अब तक बूस्टर डोज को मंजूरी नहीं दी है.

क्या है बूस्टर डोज?

बूस्टर डोज कोरोना का तीसरा डोज है जिसका उद्देश्य लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना है. दुनिया के कुछ मुल्कों में कोरोना का बूस्टर शॉट दिया जा रहा है. इसमें इजरायल और अमेरिका का नाम शामिल है. पिछले महीने ही अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने बूस्टर शॉट लिया है.

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